कोरोना वायरस - महामारी या ईश्वर का एक स्पष्ट सन्देश??
संक्षिप्त वर्णन : इस लेख में हम चर्चा करेंगे:
* विश्व और कोरोना वायरस ।
* दुनिया के सभी 196 देशों में कोरोना महामारी का दुषप्रभाव।
* कोरोनोवायरस या कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए विभिन्न देशों में विभिन्न प्रकार के लॉकडाउन।
* कोरोनावायरस और भारत।
* लॉकडाउन के दौरान प्रकृति माँ का सुन्दर ढंग से कायाकल्प।
* संगरोध या कुछ समय के लिए एकांत में रहना - घातक कोरोनावायरस का एकमात्र इलाज।
* कोरोनोवायरस महामारी के इस पाठ से मनुष्य को क्या सबक लेना चाहिए?
* कोरोनावायरस महामारी पर एक लघु एनिमेटेड फिल्म।
विस्तृत चर्चा:
जरा विचार करें, मनुष्य - सभी जीवों में श्रेष्ठ, आसमान में उड़ाने भरने वाला, धरती की सभी जीव प्रजातियों में श्रेष्ठ, अंतरिक्ष की सीमाओं को लांघने वाला, इस दुनिया का बेताज बादशाह; अचानक रुक गया और अपने ही घर में कैद हो गया । कोई डर, कोई बीमारी, कोई राजनीतिक या असले की ताकत आज से पहले उसे इस तरह रोकने में सफल नहीं हो पायी। क्या यह एक छोटे से सूक्ष्मजीव की शक्ति है या इससे परे भी कुछ है? हमें इस पर अवश्य विचार करना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।
मनुष्य कभी भी, किसी भी परिस्थिति में, इतना दयनीय नहीं हुआ। कोरोना महामारी के प्रकोप ने मनुष्यों को इतना दयनीय बना दिया है जितना वह कभी नहीं था। मनुष्य लगभग सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज कर चुका है। चाहे वो कैंसर हो , मधुमेह या हर प्रकार के गंभीर बुखार हो, श्वसन संबंधी विकार हो, मनुष्य के सामने कोई भी महामारी नहीं बन सका है। लेकिन जब कोरोनवायरस की बात आती है तो मनुष्य अपने घुटनों के बल क्यों आ गया ?
घनी आबादी वाले चीन से शुरू होकर, कोरोनावायरस ने दुनिया के एक भी राष्ट्र को नहीं बख्शा। चाहे वो संयुक्त राष्ट्र अमेरिका हो , जिसमें अब तक 20 लाख से अधिक सकारात्मक मामले हैं या वो पापुआ न्यू गिनीया हो जिसमे 10 से भी कम मामले हैं ; कोरोनावायरस ने दुनिया भर के सभी देशों के दरवाजे पर दस्तक दी है। ना कोई दवा, ना कोई टीकाकरण और ना ही कोई अन्य प्रकार का चिकित्सा कोरोनोवायरस पर काम करती है। आइये दुनिया की वर्तमान परिस्थिति का विश्लेषण करके कोरोना पहेली को सुलझाने की कोशिश करते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोनावायरस को एक वैश्विक महामारी घोषित किया है । कोरोना महामारी के कारण होने वाले नुकसान को कम करने के लिए, एकमात्र समाधान जो दुनियाँ के विभिन्न देशों को मिला वह है सॉशल डिस्टैन्सिंग या सामाजिक दूरी । इसलिए, कोरोनावायरस से निपटने के लिए अधिकांश देश लॉकडाउन का ही आश्रय ले रहे हैं । लॉकडाउन आंशिक हो या संपूर्णतः , लेकिन अधिकांश देश स्वेच्छा या अनिच्छा से भी इसे लागू कर रहे हैं । लॉकडाउन का अर्थ है चिकित्सा सेवाओं, किराने का सामान या दूध जैसी कुछ आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी व्यावसायिक गतिविधियों, जैसे शिक्षा, व्यापार, परिवहन, रेस्तरां, शॉपिंग मॉल या दुकानों आदि को अस्थायी रूप से बंद करना। कुछ देशों में, सप्ताह में अलग-अलग दिन लॉकडाउन या तालाबंदी लगाई जा रही है। कहीं-कहीं सप्ताह में 3 दिन पुरुषों को और 2 दिन महिलाओं को घरों से बाहर आने की छूट है । कुल मिलाकर, इस कोरोना महामारी से छुटकारा पाने के लिए दुनिया भर में लॉकडाउन लगाये जा रहे हैं।
भारत में पाँचवे चरण का लॉकडाउन चल रहा है, जिसमें व्यापारिक क्षेत्र, परिवहन, दुकानों आदि को धीरे-धीरे छूट दी जा रही है।
प्रकृति माँ ने प्रदूषण जैसे कि वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, मिट्टी प्रदूषण या गारबेज के विशालकाय ढेरों के रूप में अपार पीड़ा सही है।अब वायु , सड़क, जल परिवहन, एग्रोकेमिकल्स या अल्कोहल इंडस्ट्रीज, सीमेंट और अन्य निर्माण-उन्मुख कारखानो जैसी विभिन्न प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक के साथ धरती माता का सुन्दर कायाकल्प हो रहा है। दशकों के विनाश के बाद अब धरती माँ फिर से पुनर्यौवन प्राप्त कर पक्षियों और पेड़ों के रूप में गाकर अपनी खुशी व्यक्त कर रही है ।
यहां एक छोटा सा वीडियो, भारत के चंडीगढ़ क्षेत्र के आसपास से प्रस्तुत है, जो तालाबंदी के दौरान हजारों पक्षियों की खुशी उनके गायन के रूप में प्रदर्शित कर रहा है।
कृपया सुनिश्चित करें कि आपके कंप्यूटर या मोबाइल की मीडिया वॉल्यूम पूरी है उसके बाद वीडियो को प्ले करने के लिए वीडियो पर दो बार क्लिक करें।
जैसा कि दुनिया के अधिकांशतः देशों ने लॉकडाउन का आवलंभन लिया है, ज्यादातर लोग अपने घरों में ही रहने के लिए बाध्य हैं। इक्कीसवी शताब्दी के इस युग में, जहाँ हर कोई अपने जीवन में इतना व्यस्त है कि अपने परिवार के साथ बिताने के लिए किसी के पास थोड़ा भी खाली समय नहीं है। लॉकडाउन ने वास्तव में सभी को परिवार के साथ रहने और उनके साथ मधुर संबंध बनाने हेतु बहुत सुन्दर समय दिया है। जैसे कि भारत में सम्पूर्ण लॉकडाउन आपसी गलतफहमी को दूर करने में मददगार बन रहे हैं, जो काम के दबाव के कारण पैदा हो जाया करती थीं। जिस कारण घरों और परिवारों में ख़ुशी भरा माहौल है और मिलजुल कर रहने की भावना है।
क्या हम इंसान काम करने वाली मशीन बन चुके हैं? स्वार्थी-जीव जो अन्य साथी जीव प्राणियों की परवाह तक नहीं करता, अपने सुख के लिए उन्हें नुकसान पहुंचाता और प्रताड़ित करता है? अपनी ही दौड़ में अँधा हुआ अपने जीवन के मूल यानि कुदरत को ही तबाह करने पर तुला हुआ है ?
यहां कुछ समय के लिए विचार करें, शायद इसी लिए तो कहीं प्रकृति माँ या परमपिता परमात्मा ने हमें कोरोनावायरस के रूप में कोई संदेश तो नहीं भेजा है? कहीं परमात्मा हमसे यह तो नहीं चाहता कि हम उस पर विश्वास रखें और भोजन, कपड़ा, मकान जैसी बुनियादी जरूरतों के नाम पर आंखें मूंद कर उसकी सुन्दर दुनिया को ना बिगाड़ें ? जैसा कि एक प्रसिद्ध कथन है जिसके अनुसार, " प्रकृति के पास सभी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं लेकिन किसी के लालच को पूरा करने के लिए बिल्कुल नहीं। " संभवत: ईश्वर चाहता हो कि हम अपने परिवार के साथ कुछ सुंदर समय बिताएं, जो कहीं न कहीं हमारी दौड़ में नष्ट हो रहा था, जिससे प्रकृति माँ को भी फिर से स्वस्थ होने के लिए कुछ समय मिल पाये।
सामाजिक दूरी के बावजूद इस लॉकडाउन के दौरान परिवारों के आपसी रिश्ते मजबूत और मधुर हो रहे हैं और प्रकृति माँ बड़ी तेजी के साथ अपनी पूर्व महिमा में खिल रही है।
आगे बढ़ते हुए, अगर हम कोरोनावायरस के इलाज के बारे में बात करते हैं, तो कोई भी दवा इसे ठीक नहीं कर सकती। हैरानी की बात यह है कि इस जानलेवा वायरस का एकमात्र इलाज मरीज को क्वारंटाइन में रखना या उसे लगभग दो सप्ताह तक एकांत में रखना है। हमारे शरीर की रोग-प्रतिरक्षा प्रणाली स्वाभाविक रूप से इस वायरस को ठीक कर देगी । क्या यहाँ कुछ ऐसा है, जिससे हमें कुछ समझने की आवश्यकता है ? इस आधुनिक दुनिया में यह अजीब, पुरानी, या अंधविश्वासपूर्ण बात लगेगी, जो में आगे करने जा रहा हूं; लेकिन अगर परमात्मा की भी यही मर्ज़ी हो तो ?
अगर हम गौर से देखें तो सभी आध्यात्मिक शिक्षक, संत-महापुरुष, पीर-पैगम्बर, ऋषि-मुनि, गुरु जैसे कि संत रामकृष्ण परमहंस, गुरु नानक, महान फ़ारसी कवि मंसूर, यूनानी दार्शनिक सुकरात, सूफी कवि बाबा फ़रीद, महात्मा बुद्ध या ईसा मसीह, इन सभी ने अपने आप को सामाजिक संबंधों से दूर रखकर, एकांत में रह कर ही ज्ञान की प्राप्ति की थी। इस दुनिया के मूल कारण उस परमात्मा को जानने के लिए वे सभी लंबे या थोड़े समय के लिए एकांत में रहे । उन्होंने यह जानने के लिए कि परमात्मा कौन है और हम कौन हैं, अपने आप को एकांत में रखा । उन्होंने अपने ही भीतर से आत्मज्ञान पाने के लिए ऐसा किया।
क्या इस समय भी ईश्वर हमें कोरोना के जरिए कोई संदेश तो नहीं भेज रहा कि हमें अपना कुछ समय खुद को भी देना चाहिए और यह खोजना चाहिए कि ये महापुरुष पूरी मानवता से क्या कह रहे हैं ? शायद वह चाहता हो कि हमें स्वयं की वास्तविकता को जानना चाहिए और इस प्रकार उस परमात्मा को भी पहचानना चाहिए। शायद वह चाहता हो कि हम दुनिया की अंतहीन इच्छाओं और चिंताओं से छुटकारा पा जाएं और आंतरिक शांति का आनंद प्राप्त करें। शायद वह चाहता हो कि हम जन्म और मृत्यु के निरंतर चल रहे चक्र से छुटकारा पा जाएं । यह सब एकांत में रहने के बाद और अपने अंतर में झांक कर ही प्राप्त किया जा सकता है। हम सभी को यहां रुकने और इस बारे में कुछ समय के लिए विचार करने की आवश्यकता है। एक छोटा सा सूक्ष्मजीव ईतना शक्तिशाली नहीं हो सकता, परदे के पीछे भी जरूर कुछ है मेरा यह मानना है ।
मैंने बस यहाँ अपनी राय प्रस्तुत की है, हर किसी के पास स्थिति का मूल्यांकन करने और संभावनाओं से परिणाम निकालने का विवेक है। इसके साथ ही मैं अपने लेख को यहां समाप्त करता हूं। किसी भी सुझाव का ह्रदय से स्वागत है।
आइए अब कोरोनावायरस पर एक लघु एनिमेटेड फिल्म देखें। कृपया सुनिश्चित करें कि आपके कंप्यूटर या मोबाइल की मीडिया वॉल्यूम पूरी है उसके बाद वीडियो को प्ले करने के लिए वीडियो पर दो बार क्लिक करें।
आभार: Pixabay.com, Bensound.com, Unsplash।
* दुनिया के सभी 196 देशों में कोरोना महामारी का दुषप्रभाव।
* कोरोनोवायरस या कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए विभिन्न देशों में विभिन्न प्रकार के लॉकडाउन।
* कोरोनावायरस और भारत।
* लॉकडाउन के दौरान प्रकृति माँ का सुन्दर ढंग से कायाकल्प।
* संगरोध या कुछ समय के लिए एकांत में रहना - घातक कोरोनावायरस का एकमात्र इलाज।
* कोरोनोवायरस महामारी के इस पाठ से मनुष्य को क्या सबक लेना चाहिए?
* कोरोनावायरस महामारी पर एक लघु एनिमेटेड फिल्म।
विस्तृत चर्चा:
जरा विचार करें, मनुष्य - सभी जीवों में श्रेष्ठ, आसमान में उड़ाने भरने वाला, धरती की सभी जीव प्रजातियों में श्रेष्ठ, अंतरिक्ष की सीमाओं को लांघने वाला, इस दुनिया का बेताज बादशाह; अचानक रुक गया और अपने ही घर में कैद हो गया । कोई डर, कोई बीमारी, कोई राजनीतिक या असले की ताकत आज से पहले उसे इस तरह रोकने में सफल नहीं हो पायी। क्या यह एक छोटे से सूक्ष्मजीव की शक्ति है या इससे परे भी कुछ है? हमें इस पर अवश्य विचार करना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।
मनुष्य कभी भी, किसी भी परिस्थिति में, इतना दयनीय नहीं हुआ। कोरोना महामारी के प्रकोप ने मनुष्यों को इतना दयनीय बना दिया है जितना वह कभी नहीं था। मनुष्य लगभग सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज कर चुका है। चाहे वो कैंसर हो , मधुमेह या हर प्रकार के गंभीर बुखार हो, श्वसन संबंधी विकार हो, मनुष्य के सामने कोई भी महामारी नहीं बन सका है। लेकिन जब कोरोनवायरस की बात आती है तो मनुष्य अपने घुटनों के बल क्यों आ गया ?
घनी आबादी वाले चीन से शुरू होकर, कोरोनावायरस ने दुनिया के एक भी राष्ट्र को नहीं बख्शा। चाहे वो संयुक्त राष्ट्र अमेरिका हो , जिसमें अब तक 20 लाख से अधिक सकारात्मक मामले हैं या वो पापुआ न्यू गिनीया हो जिसमे 10 से भी कम मामले हैं ; कोरोनावायरस ने दुनिया भर के सभी देशों के दरवाजे पर दस्तक दी है। ना कोई दवा, ना कोई टीकाकरण और ना ही कोई अन्य प्रकार का चिकित्सा कोरोनोवायरस पर काम करती है। आइये दुनिया की वर्तमान परिस्थिति का विश्लेषण करके कोरोना पहेली को सुलझाने की कोशिश करते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोनावायरस को एक वैश्विक महामारी घोषित किया है । कोरोना महामारी के कारण होने वाले नुकसान को कम करने के लिए, एकमात्र समाधान जो दुनियाँ के विभिन्न देशों को मिला वह है सॉशल डिस्टैन्सिंग या सामाजिक दूरी । इसलिए, कोरोनावायरस से निपटने के लिए अधिकांश देश लॉकडाउन का ही आश्रय ले रहे हैं । लॉकडाउन आंशिक हो या संपूर्णतः , लेकिन अधिकांश देश स्वेच्छा या अनिच्छा से भी इसे लागू कर रहे हैं । लॉकडाउन का अर्थ है चिकित्सा सेवाओं, किराने का सामान या दूध जैसी कुछ आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी व्यावसायिक गतिविधियों, जैसे शिक्षा, व्यापार, परिवहन, रेस्तरां, शॉपिंग मॉल या दुकानों आदि को अस्थायी रूप से बंद करना। कुछ देशों में, सप्ताह में अलग-अलग दिन लॉकडाउन या तालाबंदी लगाई जा रही है। कहीं-कहीं सप्ताह में 3 दिन पुरुषों को और 2 दिन महिलाओं को घरों से बाहर आने की छूट है । कुल मिलाकर, इस कोरोना महामारी से छुटकारा पाने के लिए दुनिया भर में लॉकडाउन लगाये जा रहे हैं।
भारत में पाँचवे चरण का लॉकडाउन चल रहा है, जिसमें व्यापारिक क्षेत्र, परिवहन, दुकानों आदि को धीरे-धीरे छूट दी जा रही है।
प्रकृति माँ ने प्रदूषण जैसे कि वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, मिट्टी प्रदूषण या गारबेज के विशालकाय ढेरों के रूप में अपार पीड़ा सही है।अब वायु , सड़क, जल परिवहन, एग्रोकेमिकल्स या अल्कोहल इंडस्ट्रीज, सीमेंट और अन्य निर्माण-उन्मुख कारखानो जैसी विभिन्न प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक के साथ धरती माता का सुन्दर कायाकल्प हो रहा है। दशकों के विनाश के बाद अब धरती माँ फिर से पुनर्यौवन प्राप्त कर पक्षियों और पेड़ों के रूप में गाकर अपनी खुशी व्यक्त कर रही है ।
यहां एक छोटा सा वीडियो, भारत के चंडीगढ़ क्षेत्र के आसपास से प्रस्तुत है, जो तालाबंदी के दौरान हजारों पक्षियों की खुशी उनके गायन के रूप में प्रदर्शित कर रहा है।
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क्या हम इंसान काम करने वाली मशीन बन चुके हैं? स्वार्थी-जीव जो अन्य साथी जीव प्राणियों की परवाह तक नहीं करता, अपने सुख के लिए उन्हें नुकसान पहुंचाता और प्रताड़ित करता है? अपनी ही दौड़ में अँधा हुआ अपने जीवन के मूल यानि कुदरत को ही तबाह करने पर तुला हुआ है ?
यहां कुछ समय के लिए विचार करें, शायद इसी लिए तो कहीं प्रकृति माँ या परमपिता परमात्मा ने हमें कोरोनावायरस के रूप में कोई संदेश तो नहीं भेजा है? कहीं परमात्मा हमसे यह तो नहीं चाहता कि हम उस पर विश्वास रखें और भोजन, कपड़ा, मकान जैसी बुनियादी जरूरतों के नाम पर आंखें मूंद कर उसकी सुन्दर दुनिया को ना बिगाड़ें ? जैसा कि एक प्रसिद्ध कथन है जिसके अनुसार, " प्रकृति के पास सभी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं लेकिन किसी के लालच को पूरा करने के लिए बिल्कुल नहीं। " संभवत: ईश्वर चाहता हो कि हम अपने परिवार के साथ कुछ सुंदर समय बिताएं, जो कहीं न कहीं हमारी दौड़ में नष्ट हो रहा था, जिससे प्रकृति माँ को भी फिर से स्वस्थ होने के लिए कुछ समय मिल पाये।
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अगर हम गौर से देखें तो सभी आध्यात्मिक शिक्षक, संत-महापुरुष, पीर-पैगम्बर, ऋषि-मुनि, गुरु जैसे कि संत रामकृष्ण परमहंस, गुरु नानक, महान फ़ारसी कवि मंसूर, यूनानी दार्शनिक सुकरात, सूफी कवि बाबा फ़रीद, महात्मा बुद्ध या ईसा मसीह, इन सभी ने अपने आप को सामाजिक संबंधों से दूर रखकर, एकांत में रह कर ही ज्ञान की प्राप्ति की थी। इस दुनिया के मूल कारण उस परमात्मा को जानने के लिए वे सभी लंबे या थोड़े समय के लिए एकांत में रहे । उन्होंने यह जानने के लिए कि परमात्मा कौन है और हम कौन हैं, अपने आप को एकांत में रखा । उन्होंने अपने ही भीतर से आत्मज्ञान पाने के लिए ऐसा किया।
क्या इस समय भी ईश्वर हमें कोरोना के जरिए कोई संदेश तो नहीं भेज रहा कि हमें अपना कुछ समय खुद को भी देना चाहिए और यह खोजना चाहिए कि ये महापुरुष पूरी मानवता से क्या कह रहे हैं ? शायद वह चाहता हो कि हमें स्वयं की वास्तविकता को जानना चाहिए और इस प्रकार उस परमात्मा को भी पहचानना चाहिए। शायद वह चाहता हो कि हम दुनिया की अंतहीन इच्छाओं और चिंताओं से छुटकारा पा जाएं और आंतरिक शांति का आनंद प्राप्त करें। शायद वह चाहता हो कि हम जन्म और मृत्यु के निरंतर चल रहे चक्र से छुटकारा पा जाएं । यह सब एकांत में रहने के बाद और अपने अंतर में झांक कर ही प्राप्त किया जा सकता है। हम सभी को यहां रुकने और इस बारे में कुछ समय के लिए विचार करने की आवश्यकता है। एक छोटा सा सूक्ष्मजीव ईतना शक्तिशाली नहीं हो सकता, परदे के पीछे भी जरूर कुछ है मेरा यह मानना है ।
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आभार: Pixabay.com, Bensound.com, Unsplash।
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