नोट:

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जैविक खेती - एक विकल्प नहीं बल्कि एकमात्र रास्ता ।

संक्षिप्त वर्णन :


इस लेख में हम कृषिक्षेत्र में हरित क्रांति के दुष्प्रभावों को उलटने हेतु आवश्यक प्रतिकारों के बारे में चर्चा करेंगे। हम यहां बात करेंगे:
* जैविक या प्राकृतिक खेती क्या है?  

* दुनिया भर के लोगों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता और जैविक रूप से उगाए गये भोजन की ओर लोगों का बढ़ता रुझान। 

* जैविक खेती से संबंधित दुनिया भर में हो रहीं विभिन्न गतिविधियों की एक संक्षिप्त झलक । 

* भारत में जैविक खेती - एक उभरता आंदोलन । 

* भारत में जैविक खेती को प्रचलित करने वाले कुछ एनजीओ, क्लबों, समितियों और जैविक उत्पादों के कुछ ई-कॉमर्स स्टोरों पर एक नज़र। 

*  जैविक रूप से उगाया भोजन - पौष्टिक और संतुलित आहार और साथ ही कई बीमारियों का ईलाज भी। 

* जैविक खेती- भारत के ऋण तले दबे किसानों के लिए एक वरदान। 

* जैविक खेती- प्रकृति को कायाकल्प करने वाली खेती। 

* 'जैविक या प्राकृतिक खेती' पर एक लघु एनिमेटेड फिल्म। 


विस्तृत चर्चा :

आइए हम यह समझकर शुरू करें कि जैविक खेती या प्राकृतिक खेती क्या है
पिछली दो शताब्दियों के दौरान खेती या कृषि बहुत बदल चुकी है। मशीनों  और रसायनों के आविष्कार के साथ कृषि एक बहुत आसान पेशा बन गया है। अब खेती करते हुए, हर समय आपके हाथ और कपड़े मैले रहें यह जरूरी नहीं, आपको रोज़ाना खेतों में जाने की ज़रूरत भी नहीं, खेतों में बैल और अन्य जानवरों की भी अब ज़रूरत नहीं, आपको खुद से खरपतवार को खत्म करने की भी जरुरत नहीं, फसलों को काटने और सँभालने के लिए मजदूरों की भी अब जरुरत नहीं और यहां तक ​​कि सिंचाई के लिए प्राकृतिक संसाधनों जैसे की बारिश, नदियों और नहरों पर निर्भर रहने की भी अब कोई जरुरत नहीं रह गई ।कृषि की इस आधुनिक पद्धति को रासायन-आधारित खेती या मुनाफा-खेती या उत्पादन-उन्मुख खेती कहा जाता है। 

खेती की पारंपरिक पद्धति जिसमें कोई रसायन जैसे कि उर्वरक, यूरिया, डीएपी, कीटनाशक आदि का उपयोग नहीं किया जाता, को प्राकृतिक खेती या जैविक खेती कहा जाता है। उपरोक्त सभी को जैविक खेती में प्राकृतिक तरीके से प्रतिस्थापित किया जाता है या बदला जाता है। यहाँ सवाल यह है कि इस आधुनिक युग में जैविक खेती की क्या आवश्यकता है

जैविक खेती, जैविक खाद्य, जैविक कृषि


जैविक कृषि की आवश्यकता रासायन-आधारित खेती से जुड़े खतरों के कारण पैदा होती है। खेतों में रसायनों का व्यापक और अँधादुंध उपयोग हमारे भोजन में भी काफ़ी मात्रा में रासायनों को ले आता है । यह बदले में मानव शरीर में विभिन्न पेचीदगियों का कारण बनता है। रासायनिक रूप से उगाए भोजन को खाने से विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ जैसे विभिन्न प्रकार के कैंसर, श्वसन रोग, फेफड़ों  की खराबी, जैनेटिक विकार, त्वचा के रोग, नेत्र और गले की गम्भीर बीमारियां आदि मानव शरीर में घर कर जातीं हैं।इसके ईलावा, इन एग्रोकेमिकल-दवाओं के उपयोग और प्रबंधन से जुड़े जोखिमो को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दुनिया भर के कई किसान हर साल इन जहरीले रसायनों के गलत प्रबंधन से अपनी जान गवां बैठते हैं। यह सब कारण लोगों को प्राकृतिक खेती की ओर वापिस आने के लिए प्रेरित कर रहें है। 

रासायन-आधारित खेती से जुड़े जोखिमों से अब दुनिया भर के लोग अवगत हो रहे हैं। आखिरकार यह भोजन का सवाल है, कोई भी जहरीला भोजन नहीं खाना चाहता। इसी कारण प्राकृतिक खेती का एक आंदोलन दुनिया भर में तीव्र गति से फैल रहा है। विभिन्न समर्पित संगठन, गैर सरकारी संगठन, स्वतंत्र और सरकारी संस्थाएँ जैविक खेती पर काम कर रही हैं और इसे पूरी ऊर्जा के साथ बढ़ावा भी दे रही हैं।


जैविक उत्पाद की दुकान

दुनिया भर में विभिन्न कंपनियां, गैर-सरकारी संगठन, स्वतंत्र पर्यावरण रक्षक संस्थाएँ, रासायनिक खेती से जुड़े खतरों को टालने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। यहाँ दुनिया भर की कुछ प्रमुख एग्रोकम्पनियाँ प्रस्तुत की जा रही हैं जो जैविक खेती पर विश्वभर में व्यापक काम कर रहीं हैं और इसे दुनिया भर में बढ़ावा दे रहीं हैं : 

1. वेस्टारॉन (VESTARON)
2. एप्पिल साइंसेज  (APEEL SCIENCES)
3. बायोफार्म (BIOFARM)
4. ओमनीअरथ  (OMNIEARTH)
5. प्रोवीवी (PROVIVI) 
6. इंडिगो (INDIGO) 
7. ऐ जी बायोम (AgBIOME)
8. न्यू लीफ सिमबायोटिकस (NEW LEAF SYMBIOTICS) 
इन बहुराष्ट्रीय एग्रोकंपनियों के बारे में अधिक जानकारी के लिए लेख के अंत में दिए लिंक पर जायें।   

अब भारत की बात करें तो भारत एक कृषि आधारित देश है। भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। परंतु भारत के कृषि क्षेत्र की दशा अत्यंत दयनीय है। भारतीय कृषि, हरित क्रांति के कारण पैदा हुई चुनौतियों का सामना कर रही है। 

यहाँ "हरित क्रांति के खूनी रंग" के बारे में और अधिक जानें : 

(नोट: हिन्दी में भी यह लेख जल्द ही प्रकाशित कर दिया जाएगा। )

जैविक खेती को अपना कर और बढ़ावा देते हुए भारत के कुछ जागरूक नागरिक इस संकट का मुकाबला करने के लिए अपना पूरा प्रयास कर रहे हैं।भारत की कृषि अत्यधिक प्राचीन और संपन्न है। भारत की कृषि अपने आप में बहुत समृद्ध है, जिसमें सभी चरणों में सभी प्रकार की फसलों की संभाल की प्रत्येक तकनीक शामिल है, जो कि भारत की जलवायु के अनुकूल हो। गाये के गोबर, मूत्र, पौधों के अवशेष, लकड़ी चूरे आदि से बनी विभिन्न प्राकृतिक खादें; विभिन्न पौधों जैसे तुलसी, नीम, पारिजात, हिंग आदि से बने प्राकृतिक कीटनाशक; सहजीवी फसल प्रणाली या मैत्रीपूर्ण-फसल की विभिन्न तकनीकें, मनुष्य और प्रकृति (पक्षी , मिट्टी, पानी, पेड़ आदि) के आपसी संबंधों पर ध्यान केंद्रित करते हुए खेती करना आदि भारत की खेती की अत्यधिक सुन्दर, सम्पन्न, प्राचीन और उत्पादक तकनीकों में से हैं। यह पारंपरिक तकनीकें भारत के कुछ समर्पित लोगों के अथक प्रयासों से फिर से पुन्रजीवित हो रहीं हैं।  

भारत में जैविक खेती की पारंपरिक प्रथाओं को बहाल करने के कार्य पर पूरी दृढ़ता से काम करने वाले कुछ सक्रिय बुद्धिजीवी यहां प्रस्तुत किए गए हैं: 

1. ऑर्गेनिक फार्मिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया : ओ.एफ.ऐ.आई को भारत में जैविक खेती का सबसे बड़ा नेटवर्क माना जाता है। यहां जैविक खेती के ऊपर काम करने वाले विभिन्न लोगों, संगठनों, राज्यों आदि के बारे में जानकारी आसानी से इकट्ठा की जा सकती है। अलग-अलग क्षेत्र के अनुसार जैविक खेती की कई प्रकार की तकनीकें यहां आसानी से सीखी जा सकती हैं। ओ.एफ.ऐ.आई के विभिन्न लेख, फेसबुक पेज, समाचार पत्र आदि दिलचस्पी रखने वाले लोगों को आसानी से आवश्यक जानकारी प्रदान करते हैं।

2. सिक्किम, भारत का प्रथम 100% जैविक उत्पादन करने वाला राज्य: सन 2016 से सिक्किम भारत का पहला राज्य बन चुका है, जहाँ की सम्पूर्ण खेती 100 प्रतिशत जैविक और प्राकृतिक है। सिक्किम चावल, मक्का, बाजरा, गेहूं, जौ, संतरा, चाय और इलायची का प्रचुर मात्रा में उत्पादन करता है। इसके सभी उत्पाद 100% शुद्ध और प्राकृतिक हैं और किसी भी रासायनिक सामग्री से सर्वथा मुक्त हैं। सिक्किम सरकार और उसके लोगों के अथक प्रयासों की भारत भर में सराहना की जाती है।
3. खेती विरासत मिशन या के. वी. एम (पंजाब) : के वी एम एक गैर-सरकारी और गैर-लाभकारी संगठन है जो पंजाब में प्राकृतिक खेती को पुनर्जीवित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। यह जैविक खेती को पुनर्जीवित करने और राज्य के चारों ओर इसको बढ़ावा देने के लिए लगभग दो दशकों से सक्रिय है। भारत में आमीर खान द्वारा होस्ट किए जाने वाले प्रख्यात शो "सत्यमेव जयते" में सम्मानित होने के बाद से, के वी एम संस्था प्रसिद्धि को प्राप्त हुई और साथ ही साथ शो द्वारा एन जी ओ को कुछ वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई। 

4. भारत के कुछ अन्य जैविक खेती पर काम करने वाले लोग: इसके इलावा कुछ अन्य संगठन भी हैं जो भारत में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। हालाँकि यह संस्थाएं मूल रूप से अलग -अलग कार्यों में कार्यशील हैं पर साथ ही साथ यह जैविक खेती को भी पुन: स्थापित करने का अथक प्रयास भी कर रहीं हैं, जैसे:  
* पतंजलि आयुर्वेदा 
* ईशा  फाउंडेशन 
* इस्कॉन संस्था  
* दिव्य ज्योति जागृति सँथान 
* बंसी गिर गौशाला


इनके इलावा भारत के कुछ स्वतंत्र, खुद काम करने वाले मेहनती किसान भी जिन्होंने जैविक खेती में अपने जबरदस्त काम से अपना नाम बनाया।भारत के कुछ प्रसिद्ध जैविक खेती करने वाले किसान नीचे दिए गए हैं:
1. मध्य प्रदेश (एम.पी.) से आकाश चौरसिया जी।


                                      

2. कान सिंह निर्वाण हरियाणा से।


                                     

3. कर्नाटक से सुरेश देसाई जी।

                                      

4. पंजाब से भूतपूर्व एडवोकेट कमलजीत सिंह जी। 


                                      

इन जैविक भोजन उत्पादकों के साथ ही भारत में जैविक उत्पादों का एक बड़ी मार्केट भी है। विभिन्न ऑफ़लाइन दुकानें और ऑनलाइन पोर्टल, इन जैविक उत्पादों की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने हेतु प्रयासरत हैं। आइए, भारत में सक्रिय जैविक उत्पादों के कुछ सबसे बड़े पोर्टलों पर एक नजर डालते हैं।

1. ISAYORGANIC.COM

2. ORGANICINDIA.COM

3. 24MANTRA.COM

4. ORGANICTATTVA.COM

5. BIOMART.IN

6. SATVYK.COM


निश्चित रूप से सूची यहाँ खत्म नहीं होती है, और भी बहुत सारे लोग, संगठन हैं, संस्थाएं और समितियाँ हैं, जो कई संभावित तरीकों से जैविक कृषि पर काम कर रहे हैं। इस छोटे से लेख में इन सभी का उल्लेख करना निश्चित रूप से संभव नहीं है। मैं यहाँ अपने परिप्रेक्ष्य में कुछ सर्वश्रेष्ठ लोगों को प्रस्तुत कर रहा हूं, जो जैविक खेती पर सुंदर काम कर रहे हैं। मेरा मकसद सिर्फ, ज्यादा से ज्यादा लोगों को जैविक खेती के बारे में जागरूक करना और उन लोगों से प्रेरित होना है जो इस दिशा में मीलों आगे निकल चुके हैं। मैं क्षमा चाहता हूँ अगर मैं जैविक कृषि पर काम करने वाले किसी भी प्रमुख व्यक्ति या संस्था को प्रस्तुत करना भूल रहा हूं।

आगे बात करते हुए, जैविक खेती न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रस्तावित की जाती है, बल्कि जैविक खेती कर्ज में डूबे किसानों के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होगी। ऐसे किसान जो अपने ऋण को चुकाने में असमर्थ हैं जो कि महंगी-केमिकलयुक्त खाद, दवाईओं, कीटनाशकों आदि का भरपूर उपयोग करने की वजह से उनके सर चढ़े हैं, उनके लिए जैविक खेती सचमुच एक उम्मीद की किरण है। जैविक खेती न केवल उनके पैसे बचाएगी बल्कि उन्हें कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के खतरों से भी बाहर निकाल लेगी, जो कि केमिकल-आधारित कृषि से जुड़े हैं। इसके साथ ही दशकों से केमिकलयुक्त खेती के कारण प्रकृति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस दुष्प्रभाव को सिर्फ और सिर्फ जैविक खेती या प्राकृतिक खेती की और वापिस आकर ही ठीक किया जा सकता है।जैविक खेती को अपनाकर कुदरत, पक्षियों, पेड़ों, जंगलों, जलाशयों आदि की सुंदरता और गौरव को फिर से सजीव किया जा सकता है। इसके अलावा, प्राकृतिक रूप से उगाया गया भोजन पूरी तरह से पौष्टिक और किसी भी बीमारी पैदा करने वाले रसायनों से मुक्त होता है। निश्चित रूप से गुणवत्ता मात्रा से श्रेष्ठ मानी जाती है, इसका मतलब कि हमें 200 ग्राम प्राकृतिक रूप से उगाए गए भोजन से उतना ही पोषण प्राप्त होगा जितना कि रसायन युक्त खेती से उगाये गए 1 किलो भोजन से प्राप्त होता है। इसी लिए ही, हमको जैविक खेती की और जल्द से जल्द वापिस आने की जरुरत है और दूसरों को इस दिशा में जागरूक करने की भी। निश्चित रूप से जैविक खेती अब एकमात्र रास्ता है, कोई विकल्प नहीं इन्हीं शब्दों के साथ मैं इस लेख को यहीं समाप्त करता हूँ, किसी भी टिप्पणी, सुझाव, आलोचना का हमेशा स्वागत है। 

आइए अब 'जैविक खेती' पर एक लघु एनिमेटेड फिल्म देखें। कृपया सुनिश्चित करें कि आपके कंप्यूटर या मोबाइल की मीडिया वॉल्यूम पूरी है उसके बाद वीडियो को प्ले करने के लिए वीडियो पर क्लिक करें।






जैविक कृषि पर काम करने वाली प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बारे में अधिक जानकारी यहाँ प्राप्त की जा सकती हैं: 




आभार : Pixabay, Unsplash, Vecteezy.com

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