सफेद क्रांति से हुए दुष्परिणामों के निवारण हेतु प्रस्तावित उपाय।
इस समस्या का मूल समाधान स्वदेशी गायों और भेंसो को फिरसे बहाल करने में ही निहित है। स्वदेशी गायों का दूध A2 श्रेणी में आता है, जो वैज्ञानिक रूप से भी मानव स्वास्थ्य के लिए उत्कृष्ट है। इसके अलावा, स्वदेशी गाय पालन के साथ जुड़े और भी कई भौतिक और आध्यात्मिक लाभ हैं जैसे कि :
1. रोजाना कुछ समय के लिए स्वदेशी गाय के साथ रहने मात्र से कई गंभीर मानसिक व शारीरिक बिमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। विदेशों में हुए अनुसंधानों से यह पता चला है की भारतीय नस्ल की गाय के कम शारीरिक तापमान, कम ब्लड-प्रेशर और शान्त स्वभाव की वजह से उनके साथ रहने और उनको प्यार से छूने मात्र से ही तनाव, चिन्ता, थकान और साथ ही कई गंभीर बीमारियाँ ख़तम होने लगतीं हैं।
2. गाय के मूत्र का उपयोग कई तरह की दवाओं को बनाने में भी किया जाता है। यह उच्च कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, दिल की बीमारियों, विभिन्न प्रकार के कैंसर आदि रोगों को ठीक करने की शक्ति प्रदान करता है और अन्य कई बीमारियों से लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बलशाली बनाता है।
3. गोमूत्र और गोबर का उपयोग उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरक अथवा खाद बनाने में किया जाता है। गाय के गोबर का उपयोग धूप, अगरबत्ती आदि बनाने में भी किया जाता है, जो जलाये जाने पर पर्यावरण को स्वच्छ और आध्यात्मिक बनाता है।
4. गाय के दूध, गोमूत्र और गोबर का उपयोग कई तरह के हर्बल प्रॉडक्ट बनाने में किया जाता है। जैसे कि पंचगव्य, जो की मानव शरीर की प्रत्येक हड्डी तक पहुंचकर समस्त बीमारियों को निर्मूल करने के लिए सक्षम है।
5. कामधेनु गौशाला (संस्थापक - श्री आशुतोष जी महाराज)
कामधेनु गौशाला अपनी पूरी लगन के साथ स्वदेशी गाय की साहीवाल नस्ल को अपनी पूर्ण गरिमा में फिर से स्थापित करने के लिए प्रयत्नशील है। इसकी एक शाखा जालंधर शहर में भी स्थित है। यहाँ की गायें और बैल आकार में बहुत बड़े हैं और देखने में भी बहुत सुन्दर लगते हैं। कामधेनु गौशाला के बारे में और अधिक जानें:
7. पथमेड़ा गौधाम, राजस्थान (संस्थापक - पूज्य दत्तशरणानंदजी महाराज)
8. नामधारी समूह गौशालाएँ (संस्थापक - नामधारी समुदाय)
2. गाय के मूत्र का उपयोग कई तरह की दवाओं को बनाने में भी किया जाता है। यह उच्च कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, दिल की बीमारियों, विभिन्न प्रकार के कैंसर आदि रोगों को ठीक करने की शक्ति प्रदान करता है और अन्य कई बीमारियों से लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बलशाली बनाता है।
3. गोमूत्र और गोबर का उपयोग उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरक अथवा खाद बनाने में किया जाता है। गाय के गोबर का उपयोग धूप, अगरबत्ती आदि बनाने में भी किया जाता है, जो जलाये जाने पर पर्यावरण को स्वच्छ और आध्यात्मिक बनाता है।
4. गाय के दूध, गोमूत्र और गोबर का उपयोग कई तरह के हर्बल प्रॉडक्ट बनाने में किया जाता है। जैसे कि पंचगव्य, जो की मानव शरीर की प्रत्येक हड्डी तक पहुंचकर समस्त बीमारियों को निर्मूल करने के लिए सक्षम है।
इस दिशा में कार्यरत कुछ लोग और संगठन हैं, जिन्होंने समाज को इस बड़ी समस्या से उभारने हेतु बहुत काम किया है। मैं उनमें से कुछ को यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ:
3. बंसी गीर गौशाला अहमदाबाद, गुजरात (संस्थापक - गोपालभाई सुतारिया)।
बंसी गीर गौशाला भारत की प्रथम क्रमांकित गौशाला है। इन्होंने देशी गाय की गीर नस्ल को फिर से बहाल और साथ ही उसके संवर्धन के लिए बहुत मेहनत की है। यहाँ की गाय अब पूरी तरह से स्वदेशी हो चुकी हैं मतलब कि दोगली या गैर-नस्ली नहीं हैं और देखने में बहुत सुन्दर लगती हैं। दैनिक उपयोग के कई घरेलू उत्पाद यहाँ बनाये जाते हैं जैसे कि देसी-घी, ब्यूटी-केयर उत्पाद, आयुर्वेदिक दवाएं, रसोई से सम्बंधित उत्पाद इत्यादि। यहाँ अधिक जानकारी प्राप्त करें :
1. हेथा (HETHA), सिकंदरपुर उत्तर प्रदेश (संस्थापक - असीम रावत)
क्या आप विश्वास करेंगे कि एक आई.आई.टी(IIT) हैदराबाद से पढ़ाई किए हुए और 36 लाख से अधिक प्रति वर्ष की कमाई करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने भारत में देशी गाय की नस्लों के संरक्षण और संवर्धन तथा समाज की सेवा के उद्देश्य से अपनी नौकरी छोड़ दी? यकीन करना मुश्किल है, लेकिन हां यह सच है। श्री असीम रावत वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने स्वदेशी गायों को विलुप्त होने से बचाने के अपने दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए सिकंदरपुर (उ.प्र.) में 'HETHA' फाउंडेशन की शुरुआत की। अपने शब्दों में वह कहते हैं कि उनको अपने परिवार, रिश्तेदारों और समाज से बहुत विरोध सहन करना पड़ा, लेकिन कोई भी
क्या आप विश्वास करेंगे कि एक आई.आई.टी(IIT) हैदराबाद से पढ़ाई किए हुए और 36 लाख से अधिक प्रति वर्ष की कमाई करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने भारत में देशी गाय की नस्लों के संरक्षण और संवर्धन तथा समाज की सेवा के उद्देश्य से अपनी नौकरी छोड़ दी? यकीन करना मुश्किल है, लेकिन हां यह सच है। श्री असीम रावत वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने स्वदेशी गायों को विलुप्त होने से बचाने के अपने दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए सिकंदरपुर (उ.प्र.) में 'HETHA' फाउंडेशन की शुरुआत की। अपने शब्दों में वह कहते हैं कि उनको अपने परिवार, रिश्तेदारों और समाज से बहुत विरोध सहन करना पड़ा, लेकिन कोई भी
प्रतिकार उनकी इच्छाशक्ति को कम नहीं कर सका और अपनी मेहनत और लगन से अब वह एक सफल सामाजिक कार्यकर्ता और एक सफल बिजनेसमैन भी हैं। उनकी संस्था "HETHA" देशी गायों की साहीवाल नस्ल के संरक्षण में कार्यरत है और विश्व प्रसिद्ध हो चुकी है। आईये यहाँ उनके बारे में और जानें और प्रेरणा लें :
2. थारपारकर ब्रीडिंग सेंटर, जोधपुर (संस्थापक - भारत सिंह राजपुरोहित)
इस केंद्र का यह नाम इसलिए रखा गया है, क्योंकि यह थारपारकर नामक एक देशी गाय की नस्ल पर काम करता है। इसे 2017 में एक युवा इंजीनियर भारत सिंह ने शुरू किया था। उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट जगत की नौकरी छोड़ दी और गायों के कल्याण के लिए काम करना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में उनका ब्रीडिंग सेंटर विश्व प्रसिद्ध हो गया। इस ब्रीडिंग सेंटर और यहाँ की गायों को देखने के लिए चीन, रूस और अन्य कई देशों से लोग यहां आते हैं। कृपया यहां उनका एक वीडियो देखें और प्रेरणा लें:
इस केंद्र का यह नाम इसलिए रखा गया है, क्योंकि यह थारपारकर नामक एक देशी गाय की नस्ल पर काम करता है। इसे 2017 में एक युवा इंजीनियर भारत सिंह ने शुरू किया था। उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट जगत की नौकरी छोड़ दी और गायों के कल्याण के लिए काम करना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में उनका ब्रीडिंग सेंटर विश्व प्रसिद्ध हो गया। इस ब्रीडिंग सेंटर और यहाँ की गायों को देखने के लिए चीन, रूस और अन्य कई देशों से लोग यहां आते हैं। कृपया यहां उनका एक वीडियो देखें और प्रेरणा लें:
बंसी गीर गौशाला भारत की प्रथम क्रमांकित गौशाला है। इन्होंने देशी गाय की गीर नस्ल को फिर से बहाल और साथ ही उसके संवर्धन के लिए बहुत मेहनत की है। यहाँ की गाय अब पूरी तरह से स्वदेशी हो चुकी हैं मतलब कि दोगली या गैर-नस्ली नहीं हैं और देखने में बहुत सुन्दर लगती हैं। दैनिक उपयोग के कई घरेलू उत्पाद यहाँ बनाये जाते हैं जैसे कि देसी-घी, ब्यूटी-केयर उत्पाद, आयुर्वेदिक दवाएं, रसोई से सम्बंधित उत्पाद इत्यादि। यहाँ अधिक जानकारी प्राप्त करें :
4. काउग्रेर्ज़िंग क्लब (संस्थापक - श्री गजानंद अग्रवाल प्रभुजी)।
भारत से लेकर विदेशों तक, काउग्रेर्ज़िंग क्लब ने स्वदेशी गाय की नस्लों के संवर्धन, जैविक कृषि के कार्यान्वयन, वैदिक संस्कृति, पर्माकल्चर और साथ ही कई सम्बंधित क्षेत्रों में बहुत अच्छा काम किया है। उन्होंने भारत की अधिकांश गौशालाओं और जैविक कृषि से सम्बंधित कई किसानों को भी फिल्माया है। उनकी बनाई फिल्में सभी के लिए प्रेरणादायक हैं। उनके प्रसिद्ध Youtube चैनल से उनके बारे में और अधिक जानें:
भारत से लेकर विदेशों तक, काउग्रेर्ज़िंग क्लब ने स्वदेशी गाय की नस्लों के संवर्धन, जैविक कृषि के कार्यान्वयन, वैदिक संस्कृति, पर्माकल्चर और साथ ही कई सम्बंधित क्षेत्रों में बहुत अच्छा काम किया है। उन्होंने भारत की अधिकांश गौशालाओं और जैविक कृषि से सम्बंधित कई किसानों को भी फिल्माया है। उनकी बनाई फिल्में सभी के लिए प्रेरणादायक हैं। उनके प्रसिद्ध Youtube चैनल से उनके बारे में और अधिक जानें:
5. कामधेनु गौशाला (संस्थापक - श्री आशुतोष जी महाराज)
कामधेनु गौशाला अपनी पूरी लगन के साथ स्वदेशी गाय की साहीवाल नस्ल को अपनी पूर्ण गरिमा में फिर से स्थापित करने के लिए प्रयत्नशील है। इसकी एक शाखा जालंधर शहर में भी स्थित है। यहाँ की गायें और बैल आकार में बहुत बड़े हैं और देखने में भी बहुत सुन्दर लगते हैं। कामधेनु गौशाला के बारे में और अधिक जानें:
6. संत श्री आशारामजी गौशाला निवाई (संस्थापक - पूज्य आशाराम बापूजी)
आशाराम बापूजी और उनके आश्रम ने उन गायों को बचाकर, जो की कतलखाने भेजी जा रही थीं, समाज के लिए एक महान कार्य किया है । यहां गायों की सेवा और पूजा की जाती है। विशिष्ट घरेलू उत्पादों और आयुर्वेदिक दवाओं को गाय के दूध, मूत्र और गोबर से बनाया जाता है और फिर बहुत मामूली कीमतों पर मानव जाति की सेवा के लिए समाज में बेच दिया जाता है। देश भर में आशाराम बापूजी की कई गोशालाएँ हैं, उनमें से एक निवाई-गौशाला यहाँ प्रस्तुत है:
7. पथमेड़ा गौधाम, राजस्थान (संस्थापक - पूज्य दत्तशरणानंदजी महाराज)
पथमेड़ा गौधाम, दुनिया की सबसे बड़ी गौशाला है। देश भर से बेकार, परित्यक्त और बीमार गायों को यहाँ आश्रय प्राप्त होता है और पूरे निष्ठा भाव के साथ उनकी सेवा की जाती है। यहाँ का वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक है और गायों को यहाँ "माँ" माना जाता है और साथ ही प्रतिदिन उनकी पूजा भी की जाती है। गाय पर आधारित उत्पाद भी यहाँ बनाए जाते हैं और मानव जाति की सेवा में लगा दिए जातें हैं। कृपया पथमेड़ा गौधाम पर बनी एक बहुत लोकप्रिय फिल्म यहाँ अवश्य देखें :
नामधारी समुदाय गायों की स्वदेशी नस्ल की रक्षा और उनका संवर्धन करनेके लिए कई दशकों से काम कर रहा है। वे देशी गाय की साहीवाल नस्ल पर अपनी पूरी शक्ति के साथ काम कर रहे हैं। वे छोटे बछड़ो से लेकर बड़ी-बूढ़ी सभी गायों का रिकॉर्ड रखते हैं। उनके गोत्र और नाम भी रखे गए हैं जिनसे की रिकॉर्ड रखने में आसानी हो। उनका किया गया काम वाकई सराहनीय है।
नामधारी गोशालाओं के बारे में यहाँ और अधिक जानें:
सूची यहाँ खत्म नहीं होती है, लेकिन विषय को अतिरंजित न करते हुए मैं इसे यहीं समाप्त करता हूं। कुछ नया और अच्छा जानने और प्रेरित होने के लिए, हम सभी के लिए यह पर्याप्त होगा। इन सभी को शुरुआती अवस्था में समाज से भारी बाधाओं और विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन अब समाज उन महानुभावों का ऋणी है और उनके प्रति सम्मान की भावना रखता है। जैसा कि स्वामी विवेकानंद कहते हैं:
सूची यहाँ खत्म नहीं होती है, लेकिन विषय को अतिरंजित न करते हुए मैं इसे यहीं समाप्त करता हूं। कुछ नया और अच्छा जानने और प्रेरित होने के लिए, हम सभी के लिए यह पर्याप्त होगा। इन सभी को शुरुआती अवस्था में समाज से भारी बाधाओं और विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन अब समाज उन महानुभावों का ऋणी है और उनके प्रति सम्मान की भावना रखता है। जैसा कि स्वामी विवेकानंद कहते हैं:
"प्रत्येक महान कार्य को तीन अवस्थाओं में से गुजरना पड़ता है, जो हैं १. विनोद २.विरोध ३ .स्वीकृति "। इनमें से प्रत्येक पहले दो कठिन चरणों में से गुजरकर, अब तीसरे चरण का आनंद ले रहे हैं और अपने द्वारा चुने गए मार्ग पर स्वतन्त्रता के साथ चल रहें हैं और अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रहें हैं।
आगे बढ़ते हुए, अगर हममें से कुछ, जिन्होंने इनसे प्रेरणा ली और इस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है। वह इनमें से किसी से भी सीधे संपर्क कर सकते हैं और स्वदेशी गायों के कल्याण के लिए और इस हेतु समाज के कल्याण के लिए उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। यहाँ एक और संगठन है जो गायों के दूध, मूत्र और गोबर से विभिन्न उत्पादों को बनाने के लिए स्वदेशी गायों के साथ काम करने का प्रशिक्षण प्रदान करता है। जो कोई भी इच्छुक हो, वह यहां से शुरू कर सकता है। यहाँ उनकी वेबसाइट का लिंक दिया गया है:
http://govigyan.com/
आगे बढ़ते हुए, अगर हममें से कुछ, जिन्होंने इनसे प्रेरणा ली और इस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है। वह इनमें से किसी से भी सीधे संपर्क कर सकते हैं और स्वदेशी गायों के कल्याण के लिए और इस हेतु समाज के कल्याण के लिए उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। यहाँ एक और संगठन है जो गायों के दूध, मूत्र और गोबर से विभिन्न उत्पादों को बनाने के लिए स्वदेशी गायों के साथ काम करने का प्रशिक्षण प्रदान करता है। जो कोई भी इच्छुक हो, वह यहां से शुरू कर सकता है। यहाँ उनकी वेबसाइट का लिंक दिया गया है:
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